तहज़ीब के शहर लखनऊ की सरज़मीन पर पैदा हुआ, पीलीभीत के तराई इलाके में पला-बढ़ा और अब मुश्तक़िल 1998 से लखनऊ का बाशिंदा हूँ | शिक्षा MBA in Tourism. अंतरजाल पर सन् 2001 से लिख रहा हूँ कई वेबसाइट भी बनाई मगर ब्लॉग जगत से जुडाव 2009 से ही हुआ | शौक़ ग़ज़लों का | भारतीय मुसलमान होने पर गर्व, लेकिन अगर कहीं भेदभाव होता है तो कलम अपने आप उठ जाती है | लोग कहते है कि मैं बहुत बुनियादपरस्त (Fundamentalist) हूँ और वह सही कहते है मैं वाकई बुनियादपरस्त ही हूँ| एक शेर अर्ज़ है ...."मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया!" Cell: 9838659380